संसद में विधायी प्रक्रिया

संसद में पेश होने वाले विधेयकों को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है।

  • सरकारी विधेयक
  • गैर-सरकारी विधेयक

साधारण विधेयक (Ordinary bill)

अनु० – 107 के अनुसार साधारण विधेयकों को किसी भी सदन में प्रस्तुत किया जा सकता है , इसके अंतर्गत वितीय विषयों को छोड़कर अन्य सभी विषयों से संबंधित विधेयक साधारण विधेयक कहलाते है।

धन विधेयक (Money Bill)

अनु०-110 के अंतर्गत परिभाषित किया गया है की धन विधेयक लोकसभा में केवल राष्ट्रपति की संस्तुति पर ही प्रस्तुत किया जा सकता है। यह वितीय विषयों से संबंधित होते है। धन विधेयकों को राज्यसभा अधिकतम 14 दिनों तक रोक सकती है।

वित्त विधेयक (Finance bill)

यह भी वित्त से संबंधित विधेयक होते है । जैसे – राजस्व आय या व्यय से संबंधित , वित्त विधेयक तीन प्रकार के होते है —

  • वित्त विधेयक (अनु० – 117 A)
  • वित्त विधेयक (अनु० – 117 C)
  • धन विधेयक (अनु० – 110)

किसी विधेयक पर वह धन विधेयक है या नहीं लोकसभा अध्यक्ष का निर्णय अंतिम होता है । इसे सदन में केवल मंत्री द्वारा ही पेश किया  सकता है । राज्यसभा व राष्ट्रपति के पास भेजने से पूर्व अध्यक्ष इसका धन विधेयक के रूप में पृष्ठांकन करता है। यदि राज्य सभा धन विधेयक को 14 दिनों तक वापस नहीं  करती  तो वह दोनों सदनों में पारित समझा जाएगा । अत: सभी धन विधेयक वित्त विधेयक होते है किंतु सभी वित्त विधेयक , धन विधेयक नहीं होते है ।

संविधान संसोधन विधेयक ( अनु० 368 )

अनु० – 368 के अंतर्गत संविधान संसोधन की प्रक्रिया तथा इससे संबंधित संसदीय शक्ति का वर्णन किया गया है। संविधान संसोधन हेतु दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत (2/3) की आवश्यकता होती है। राज्य सभा द्वारा इसे अस्वीकार किए जाने पर बैठक नहीं बुलाई जा सकती है ।

संसद में विधेयक प्रस्तुत करने की प्रक्रिया 

किसी भी सदन में विधेयक प्रस्तुत होने पर निम्न प्रक्रियाओं से गुज़रता है —

प्रथम पाठन

इसके अंतर्गत किसी भी विधेयक को संसद में प्रस्तुत किया जा सकता है। किसी भी विधेयक को संसद में प्रस्तावित करने से पूर्व सदन को अग्रिम सुचना देना अनिवार्य है , प्रस्तुतकर्ता द्वारा विधेयक का शीर्षक व इसका उद्देश्य बताता है व इसके सदन में बहुमत से पास होने के बाद भारत के राजपत्र (Gazette of India) में प्रकाशित  किया जाता है।
संसद में विधेयक का प्रस्तुतीकरण एवं उसका राजपत्र में प्रकाशित होना ही प्रथम पाठन कहलाता है ।

द्वितीय चरण – 

इसके अंतर्गत तीन चरण उल्लेखनीय है –

  • सामान्य बहस
  • समिति अवस्था
  • विचार विमर्श की अवस्था

सामान्य बहस की अवस्था 

इस अवस्था के अंतर्गत विधेयक के सिद्धांत व उपबंधो पर चर्चा होती है किंतु विधेयक पर विस्तार से विचार विमर्श नहीं किया जाता है, इसके संबंध में संसद निम्न 4 में से कोई एक कदम उठा सकती है —

  • संसद विधेयक पर तुरंत चर्चा करा सकती है या कोई अन्य तिथि निर्धारित की जा सकती है।
  • इसे सदन की प्रवर समिति को सौंपा जा सकता है ।
  • दोनों सदनों (लोकसभा व राज्यसभा) की संयुक्त समिति को सौंपा जा सकता है
  • जनता के विचार जानने हेतु सार्वजनिक किया जा सकता है।

समिति अवस्था 

इस अवस्था में विधेयक पर विचार अथवा इसके उपबंधो को तैयार किया जाता है किंतु समिति विढेक के मूल विषय में परिवर्तन नहीं कर सकती है तथा विधेयक की समीक्षा के बाद इसे सदन को सौंप दिया जाता है।

विचार विमर्श की अवस्था 

प्रवर समिति द्वारा विधेयक प्राप्त होने के उपरांत सदन द्वारा इसके सभी उपबंधो पर खंडवार चर्चा व मतदान होता है। इसी अवस्था में  इसमें संसोधन कर विधेयक में जोड़ा जा सकता है।

तृतीय चरण

इस चरण में विधेयक को केवल स्वीकार या अस्वीकार किया जाता है तथा इसमें कोई संसोधन नहीं किया जा सकता है। एक सदन से पारित होने के बाद इसे दूसरे सदन में भेज दिया जाता है।
दूसरे सदन में भी प्रथम सदन की तरह इसमें भी प्रथम , द्वितीय व तृतीय चरण होते है । दूसरे सदन से भी पास होने के बाद विधेयक को राष्ट्रपति के पास स्वीकृति के लिए भेजा जाता है।

राष्ट्रपति की अनुमति 

अनु०- 111 के अनुसार जब संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित विधेयक राष्ट्रपति के पास स्वीकृति के लिए भेजा जाता है तो राष्ट्रपति के पास तीन विकल्प होते है।

  • राष्ट्रपति विधेयक को स्वीकृति दे सकता है।
  • विधेयक को ना देने हेतु राष्ट्रपति द्वारा रोका जा सकता है।
  • राष्ट्रपति द्वारा विधेयक को पुनर्विचार हेतु सदन के पास वापस भेजा जा सकता है किंतु बिना संसोधन किए विधेयक को पुन: राष्ट्रपति के पास वापस भेजे जाने पर राष्ट्रपति विधेयक पर स्वीकृति देने हेतु बाध्य है।

NOTE:
धन विधेयक केवल मंत्री द्वारा राष्ट्रपति की अनुमति से केवल लोकसभा में ही पेश किया जा सकता है । इसे पारित करने की प्रक्रिया भी ऊपर दी गई प्रक्रिया के समान है किंतु इसे राज्यसभा द्वारा अधिकतम 14 दिनों तक रोका जा सकता है (अर्थात् धन विधेयक के संबंध में लोकसभा की शक्ति अधिक है )

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