बिहार की भौगोलिक संरचना (Geographical structure of Bihar)

संरचनात्मक दृष्टिकोण से बिहार को प्री-कैंब्रियन (Pre-Cambrian) कल्प से लेकर चतुर्थ कल्प तक की चट्टानें पाई जाती हैं। प्री-कैंब्रियन (Pre-Cambrian) कल्प की चट्टानें धारवाड़ संरचना और विंध्यन संरचना के रूप में बिहार

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बिहार की भौगोलिक स्थिति (Geography of Bihar)

बिहार गंगा के मध्य मैदानी भाग में स्थित पूर्वी भारत का राज्य है। बिहार का वर्तमान स्वरूप 15 नवंबर, 2000 को झारखंड के पृथक् होने के बाद आया है। आयताकार आकृतिवाला वर्तमान

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बिहार के भौगोलिक प्रदेश का वर्गीकरण

संरचना एवं उच्चावच की भिन्नता के आधार पर बिहार को मुख्यत: तीन भागों में विभाजित किया सकता है। शिवालिक पर्वतीय प्रदेश, गंगा का मैदान छोटानागपुर सीमांत पठारी प्रदेश बिहार की क्षेत्रीय प्राकृतिक

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बिहार की भौतिक विशेषताएँ (उच्चावच)

बिहार  में अनेक प्रकार की भौतिक विविधताएँ जैसे – पर्वत, पठार और मैदान सभी प्रकार की भू-आकृतियाँ पाई जाती हैं। यद्यपि बिहार का अधिकांश भू-भाग मैदानी क्षेत्र है, किन्तु उत्तर में स्थित

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बिहार के प्रमुख लोकनृत्य (Bihar’s major folk dance)

बिहार में लोकनृत्यों का भी अत्यधिक महत्व है। यहाँ सभी पर्वों, जैसे- संस्कार, पर्व और मनोरंजन इत्यादि पर लोकनृत्यों को किया हटा है इन लोकनृत्यों से आपसी सौहार्द और एकता का भाव

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बिहार की प्रमुख जनजाति (Major Tribe’s of Bihar)

बिहार से विभाजित होकर नया राज्य बनने के पश्चात  झारखंड में  जनजातियों की संख्या बहुत कम हो गई, किन्तु  कुछ जनजातियों अभी भी हैं, जो बिहार की समृद्ध सामाजिक संस्कृति को अपनी

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बिहार के प्रमुख लोकनाट्य (Bihar’s major folk drama)

बिहार के लोकनाट्यों का जनजीवन में काफी महत्वपूर्ण स्थान है। इन नाटयों में अभिनय, संवाद, कथानक, गीत तथा नृत्यों का अत्यधिक महत्व  हैं। इन्हें सांस्कृतिक और मांगलिक अवसरों पर दक्ष कलाकारों द्वारा

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बिहार के प्रमुख लोकगीत (Major folksong of Bihar)

भारत में क्षेत्रीयता के आधार पर लोकगीतों का स्थान बहुत महत्त्वपूर्ण है। प्रत्येक राज्य में लोकगीतों की अलग-अलग परंपरा रही है। यह लोकगीतों  पर्व-त्योहार, शादी-विवाह, जन्म, मुंडन, जनेऊ आदि अवसरों पर गाए

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प्राचीन बिहार में सामाजिक एवं धार्मिक सुधार आंदोलन

ऋग्वैदिक काल (1500-1000 ई.पू.) के अंतिम चरण में सामाजिक जीवन में कई प्रकार की कुरीतियों आने लगीं। ऋगवेद के दसवें मंडल के पुरुष सूक्त में पहली बार वर्ण-व्यवस्था का उल्लेख हुआ है,

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बिहार का प्राक्-ऐतिहासिक और ऐतिहासिक काल

बिहार में मानव सभ्यता के इतिहास को मुख्यत: दो भागों में विभाजित किया जा सकता है  प्राक्-ऐतिहासिक काल  ऐतिहासिक काल प्राक्-ऐतिहासिक काल प्राक्-ऐतिहासिक काल से सम्बंधित आदि मानव के निवास के साक्ष्य

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